हम तो जिम्मेदारी निभा रहे है
सच बोलने की हिम्मत हर किसी में नहीं होती। हमारे बडे नेता वैंकया नायडू ने ये हिम्मत दिखाई और प्रेस को नसीहत देते हुए कहा कि अच्छी बातें छापे और बुरी बातों से परहेज करें। ये मंत्री नाम का जो पद है न जिसको मिलता है वह इस पर बैठता नहीं है, क्योंकि आराम करने का तो इनके पास समय ही नहीं है। जितना भी समय होता है उसमें भाषण याद करते है। इतना भाषण याद करने के बाद कभी-कभी कुछ अनाप-सनाप निकल ही जाता है। ये ठीक है लेकिन प्रेस वालों को इसे छापकर सभी को दिखाने की क्या जरूरत है। ऐसा है कि दिन में दो-चार जगह बोलबाल लेते है तो मन हल्का हो जाता है। राजनेताओं का ऐसा है न कि ये भी बेचारे क्या करे जैसे पेट में गुड़गुड़ हाने पर जाना ही पड़ता है, वैसे इनके जुबान में भी गुड़गुड़ मची रहती है जो आता है वह निकाल देते है। सभी से गुजारिश है कि एक बात समझ लो और गांठ बांध लो कि जिनके हाथ में सूचना का प्रसारण करता है वह कैसे कोई चीज गलत छपने दे सकते है। भई सभी नेतोओं की जिम्मेदारी है कि सत्ता में रहना है तो कुछ बुरा न छपने पाए, अब जिम्मेदारी तो निभानी ही पडे़गी।
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